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कला व् जीवन
 
धर्मशालाएं
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!!!......स्वच्छ, प्रगतिशील कला और जीवन पर ही स्वच्छ लक्षण व् सभ्यता का निर्माण होता है| यह सूत्र ही समाज को जीवंत व् संवेदनशील बनाता है|......!!!
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हरियाणा में धर्मशालाओं की परम्परा








जय दादा नगर खेड़ा बड़ा बीर




लेखक: रणबीर सिंह फौगाट

प्रकाशन: निडाना हाइट्स

प्रथम संस्करण: 27/06/2013

प्रकाशक: नि. हा. शो. प.

उद्धरण:
  • नि. हा. सलाहकार मंडल

साझा-कीजिये
 
कला व् जीवन विषय बॉक्स

निडाना हाइट्स के संज्ञान परिभाग के अंतर्गत आज तक के प्रकाशित विषय/मुद्दे| प्रकाशन वर्णमाला क्रम में सूचीबद्ध किये गए हैं:

कला व् जीवन:

हिंदी में लेख:
  1. हरियाणवी भित्तिचित्र कला
  2. हरिगंधा लोकवार्ता
  3. हरियाणा का लोक-इतिहास
  4. हरियाणा की धर्मशाला-परम्परा
  5. हरियाणा की आहार परम्परा
  6. हरियाणवी बुनकरों की धरोहर
  7. संस्कृति के वाहक
  8. हरियाणा की धाड़ संस्कृति
  9. प्राचीन भारत को जाट/जट्ट की देन
  10. परिवर्तन के आयाम
  11. ग्रामीण लोक-इतिहास
  12. कृषि से जन्मी कला
Articles in English:
  1. Changes in Haryana Villages
  2. Art of Haryanvi Kumhaars
  3. Woodcrafts in Haryana
  4. On trail of Rabaris
  5. Fading Frescoes of Haryana
  6. Crumbling Heritage of Haryana
  7. Kuans-Baolis of Haryana
  8. Saanjhi Ri - The folk art
  9. Salvaging Symbols of Haryana
  10. Magnificent Masonry Tanks
NH Case Studies:
  1. Farmer's Balancesheet
  2. Right to price of crope
  3. Property Distribution
  4. Gotra System
  5. Ethics Bridging
  6. Types of Social Panchayats
  7. खाप-खेत-कीट किसान पाठशाला
  8. Shakti Vahini vs. Khaps
  9. Marriage Anthropology
  10. Farmer & Civil Honor
नि. हा. - बैनर एवं संदेश
“दहेज़ ना लें”
यह लिंग असमानता क्यों?
मानव सब्जी और पशु से लेकर रोज-मर्रा की वस्तु भी एक हाथ ले एक हाथ दे के नियम से लेता-देता है फिर शादियों में यह एक तरफ़ा क्यों और वो भी दोहरा, बेटी वाला बेटी भी दे और दहेज़ भी? आइये इस पुरुष प्रधानता और नारी भेदभाव को तिलांजली दें| - NH
 
“लाडो को लीड दें”
कन्या-भ्रूण हत्या ख़त्म हो!
कन्या के जन्म को नहीं स्वीकारने वाले को अपने पुत्र के लिए दुल्हन की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए| आक्रान्ता जा चुके हैं, आइये! अपनी औरतों के लिए अपने वैदिक काल का स्वर्णिम युग वापिस लायें| - NH
 
“परिवर्तन चला-चले”
चर्चा का चलन चलता रहे!
समय के साथ चलने और परिवर्तन के अनुरूप ढलने से ही सभ्यताएं कायम रहती हैं| - NH
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